Valley OF FLOWERS UTTARAKHAND | उत्तराखंड का मशहूर वैली ऑफ़ फ्लॉवर कैसे पहुंचे

Valley OF FLOWERS UTTARAKHAND
Valley OF FLOWERS UTTARAKHAND

Valley OF FLOWERS UTTARAKHAND :  अगर आप घूमने फिरने के शौकीन है और आपको  वैली फ्लॉवर देखने को मिल जाए तो क्या कहने । दोस्तों ज्यादातर फूलों की घाटी , उत्तराखंड के अधिकांश कस्बों और शहरों से जुड़ी है । अगर आप  फूलों के बीच में रहकर आनंद लेना चाहते है तो आपको एक बार उत्तराखंड के मशहूर वैली ऑफ़ फ्लॉवर आना चाहिए । देव स्थल उत्तराखंड अपने प्रकतिक विविधताओं के लिए जाना जाता है विश्व विख्यात फूलो की घाटी यहीं पर है जो फूलो, हरियाली और अच्छे वातावरण से सबका मन मोह लेती है। आपको बता दें कि यहां पर दुनिया के दुर्लभ प्रजाति के फूल, वन्य जीव जंतु , कई प्रजाति के पक्षी और जड़ी बूटियां पाई जाती है  उत्तराखंड को भारत में सबसे सुंदर राज्यों में से एक माना जाता है ऐसा राज्य जो आस्था और पर्यटक दोनों को संजो कर रखे है यहां हर साल लाखों की संख्या में देश के कोने कोने से पर्यटक आते है ।

Kya hai Valley of flowers ka itihas

Valley of Flowers Uttarakhand: दुनिया की कोई भी चीज होती है तो उसका सामना इतिहास से जरूर होता है। ऐसा ही कुछ इतिहास वैली ऑफ़ फ्लॉवर का भी है आज से करीब एक सदी पहले तक खूबसूरत वैली ऑफ़ फ्लॉवर की जानकारी बाहरी दुनिया को कम थी । इसकी खोज का किस्सा और इतिहास काफी दिलचस्प है । साल 1931 में ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक एस स्मैथ ,एरिक सिप्टन और आर एल होल्ड स्वार्थ माउंट अभियान से लौटने के दौरान अपना रास्ता भटक गए ।इसके बाद वो चलते चलते एक ऐसी घाटी पहुंच गए जो फूलो से भरी थी ।इसकी सुंदरता इतनी अच्छी थी उसे वैली ऑफ़ फ्लॉवर नाम दे दिया । इसके कुछ साल बाद फ्रैंक ने एक किताब भी लिखी । साल 1939 में रॉयल बोटेनिक गार्डेन केयू द्वारा को फूलो के अध्यन के लिए वहां भेजा गया। लेकिन  रास्ते में चट्टानों से वह फिसल गई। उनकी मृत्यु हो गई। आपको बता दें कि साल 1992 में प्रोफेसर   चन्द्र प्रकाश काला ने घाटी के फूलो और उनके सरंक्षण पर गहन अध्यन किया ।

Valley of flowers ke rochak tathya

  • भारत सरकार ने 1982 को इस घाटी राष्ट्रीय उद्यान के रूप में मान्यता दी ।
  • साल 1988 में यूनेस्को ने इस घाटी की अद्भुत सुंदरता और स्वच्छ वातावरण को ध्यान में रखते हुए  वैली ऑफ़ फ्लॉवर को विश्व के धरोहर मे शामिल कर लिया। 
  • भारतीय वन अनुसंधान ने वर्ष 1992 में इस घाटी के आसपास लगभग एंजियों स्पर्म की प्रजातियों वाले पौधे मिले। 
  • इस वैली कि समुन्द्र तल से ऊंचाई लगभग 3352 से 3658 मीटर है आपको बता दें कि यह नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान का ही हिस्सा है 
  • इस घाटी में लगभग 500 प्रजातियों के रंग बिरंगे फूल पाए जाते है।

Valley of flowers me phoolon ki prajati

दोस्तों वैली की पूरी घाटी दुर्लभ और विदेशी हिमालयी फूलों से भरी हुई है। क्योंकि यहां फूलों की 400 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है। जिनमे एनिमोन,जेरेनियम, प्रेमल्स, ब्लू पोस्पी,और ब्लूबेल शामिल है। एक जरूरी बात यहां की ब्रम्ह कमल सबसे खूबसूरत है। जिसे उत्तराखंड का राज्य फूल भी कहा जाता ही। यहां पर पाए जाने वाले तरह तरह के फूल पर्यटकों को अपनी ओर खींचते है। फूलों की घाटी तक पहुंचने वाले रास्ते में कई खूबसूरत पुल ग्लेशियर और झरने भी देखने को मिलेंगे। साथ ही घाटी में कई प्रकार के दुर्लभ प्रजाति के फूल भी देखने को मिलेंगे। यहां पूरे साल विभिन्न प्रकार के फूलों  की दुर्लभ प्रजाति के फूल खिले रहते है। इनमें से सबसे मनमोहक फूल मोरिना लोंगीफोलिया है। इन फूलों की खुशबू हर तरह दूर से ही आने लगती ही।फूलों की घाटी में इकोनिटम , बालफोरी और सेनेसियो नाम के फूल भी मौजूद है। जो काफी जहरीले होते है। इसलिए अगर आप यहां जा रहे है। तो सभी फूलों की जानकारी अच्छे से कर लें। इन फूलों की घाटी को दुनियाभर से लोग देखने के लिए आते है। भारत के उत्तराखंड में बसी ये फूलों की घाटी पर्यटकों और ट्रैकर्स को आकर्षित करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फूलों की घाटी का उल्लेख रामायण और महाभारत में भी मिल जायेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फूलों की घाटी वही जगह है। जहां हनुमान जी लक्ष्मण को बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाए थे।

Kaise pahunche phoolon ki ghati Valley of  flowers

अगर आप वैली ऑफ फ्लावर्स जाना चाहते है। तो यहां पहुंचने के लिए सबसे पास में देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। दिल्ली से कई हवाई जहाज यहां रोज पहुंचते है। देश के अन्य राज्य से भी हवाई जहाज यहां आते है। अगर आप ट्रेन से सफर कर रहे है तो सबसे पास का रेलवे स्टेशन ऋषिकेश का है। आपको गोविंद घाट पहुंचाने के लिए यहां आपको टैक्सी और बस मिल जाएगी। इसके अलावा सड़क मार्ग से आप खुद की कार से भी जा सकते है। दोस्तों गोविंद घाट से फूलों की घाटी तक के लिए आपको करीब 16 किलोमीटर का सफर तय करना होगा।गोविंद घाट दिल्ली, उत्तराखंड और अन्य प्रमुख स्थल जैसे ऋषिकेश, पौड़ी, चमोली,श्री नगर जैसी जगहों बस मार्ग द्वारा जुड़ी हुई है।

Brajesh Saini

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